शनिवार, 9 अक्टूबर 2021

फैटी लीवर क्या है? फैटी लिवर के लक्षण, कारण, उपचार, और बचाव || What is Fatty Liver? Fatty liver symptoms, causes, treatment, and prevention in Hindi

लीवर हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, लीवर को हिंदी में यकृत, जिगर, कलेजा कहते हैं‌।

लीवर का प्रमुख कार्य विभिन्न चायपचायों को डिटॉक्सिफाई (detoxify) करना, प्रोटीन का संश्लेषण और पाचन के लिए आवश्यक जैवि रासायनिक पदार्थ आदि बनाता है।

आपको पता होना चाहिए कि लिवर‌‌ हमारे शरीर का सबसे बड़ी ग्रंथि (gland) है। और यहीं पर पित्त (bile) का निर्माण होता है। यह तो हो गए लीवर के कुछ सामान्य जानकारी, अब हम लोग बात करेंगे फैटी लीवर के बारे में बहुत सारे लोग सोचते हैं की फैटी लीवर (fatty liver) शराब पीने वाले व्यक्ति को होता है। पर ऐसा कुछ नहीं है।



फैटी लीवर सामान्यता बहुत ज्यादा मात्रा में खाना खाने,शराब पीने या अनियमित मात्रा में फैट युक्त भोजन फैटी लीवर के प्रमुख कारण हो सकते हैं। मोटापा भी इनमें से एक प्रमुख कारण है। 




फैटी लीवर क्या है 

(What is fatty liver in Hindi)


फैटी लीवर का अर्थ जैसा कि नाम से पता चलता है लीवर में में अतिरिक्त फैट जमा होना। 

लीवर में फैट जमा होने के कारण लिवर फैलियर और लिवर सिरोसिस का कारण बन सकता है। अक्सर फैटी लिवर की समस्या उन लोगों में ज्यादा होता हैं जो अक्सर पेटों की समस्याओं से परेशान रहते हैं, या फिर कम भूख लगना, वजन में गिरावट, पेट दर्द की समस्या आदि रहती हो।

अक्सर लोग सोचते हैं कि फैटी लीवर शराब पीने वाले व्यक्ति को होता है पर ऐसा कुछ नहीं है, फैटी लिवर किसी व्यक्ति को हो सकता है।

फैटी लीवर के प्रकार 

(Types of fatty liver in Hindi)

फैटी लीवर दो प्रकार के होते हैं:-

1. एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज

(alcoholic fatty liver disease)


जैसा कि नाम से पता चलता है, यह डिजीज शराब की अत्यधिक सेवन करने वाले व्यक्ति को होता है

इसमें लीवर में सूजन और लीवर क्षतिग्रस्त हो जा सकते हैं। 

2.नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज

(Nonalcoholic fatty liver disease) (NFLD)

जैसा कि नाम से पता चलता है ऐसे लोग शराब का सेवन नहीं करते लेकिन गलत खानपान,‌ गलत लाइफ़स्टाइल या फिर अनुवांशिक गुणों ‌के कारण यह समस्या उत्पन्न हो सकती है, साथ ही मोटापा और मधुमेह भी इसके प्रमुख कारण है।



नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर के चार स्टेज होते हैं।

1.सिंपल (सामान्य) फैक्ट डिपोजिशन या स्टेटोजिज (steatosis) 

इस कंडीशन में लीवर में सूजन तो नहीं देखते और ना ही कोई  लक्षण दिखते हैं इसमें आप अच्छी डाइट लेकर इसे सुधार सकते हैं

2.नॉन-एल्कोहलिक स्टियाटोहेपाटाइटिस 

(Non-alcoholic steatohepatitis)

-इस स्टेज में लिवर में स्वेलिंग आने लगती है और इसके भी समानता लक्षण दिखने लगते हैं

3.फाइब्रोसिस (fibrosus)

-इस स्टेज में लिवर के सेल्स डैमेज होने लगते हैं और लक्षण थोड़े बहुत दिखते हैं।

4.सिरोसिस (cirrhosis)

-इस स्टेज में लीवर काफी हद तक काम करना बंद कर देते हैं , और लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई और घातक रूप में दिखाई देते हैं

Note:-फैटी लीवर के बारे में चिंता की विषय यह है कि लगभग 80% डैमेज होने के बाद पता चलता है


फैटी लीवर के कारण

(Cause of fatty liver in Hindi)


•खराब लाइफस्टाइल, खराब डाइट 

•अत्यधिक खाना 

•मोटापा , डायबिटीज, अनुवांशिक डिसऑर्डर

• हाई ब्लड प्रेशर ,थायराइड

•हाई कोलेस्ट्रॉल

•दवाई का अत्यधिक सेवन


फैटी लिवर के लक्षण 

(Symptom of fatty liver in Hindi)

फैटी लिवर के लक्षण शुरुआत में तो पता नहीं चलता और स्पष्ट रूप से दिखाई भी नहीं देते, पर समय के साथ-साथ इसके लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं,जैसे कि:-

•पेट की दाएं हिस्से में दर्द होना 

•थकान, कमजोरी महसूस करना 

•भूख ना लगना 

•वजन में गिरावट 

जब समस्या बढ़ जाती है तो 

•आंखों और त्वचा में पीलापन दिखाई देने लगते हैं



फैटी लीवर के बचाव

(Prevention of fatty liver)

•अपने वजन को बैलेंस रखें मोटापा से बचें 

•आहार में चिकनाई (जैसे की तली भुनी चीजों हुई चीजें) का इस्तेमाल ना करें 

•ज्यादा नमक और रेड मीट का सेवन ना करें 

•शराब का सेवन हो सके तो बिल्कुल ही बंद कर दें 

•ग्रीन टी, व्हे प्रोटीन ले 

•हरी सब्जी का इस्तेमाल कैसे करें 

•योगा या व्यायाम अवश्य करें 

•अगर आपको ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की शिकायत है उसे कंट्रोल में रखें 

•कोई भी मेडिसिन लेने से पहले आप अपने डॉक्टर से अवश्य ही सलाह लें


लिवर ट्रांसप्लांटेशन

(Liver transplantation)


लिवर ट्रांसप्लांटेशन इसकी सामान्य प्रक्रिया यह है‌। जिस व्यक्ति को लिवर ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत होती है उसके परिवार के किसी सदस्य जैसे कि 

माता/पिता, पति/पत्नी के अलावा सगे भाई/बहन द्वारा लिवर डोनेट किया जा सकता है।


"दोस्तों आपको यह आर्टिकल कैसा लगा अगर अच्छा लगा हो तो कमेंट में जरूर बताएं 

अगर आप किसी टॉपिक के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट में जरूर बताएं"

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Dr.Sumit Ranjan 





गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021

ल्यूकोप्लाकिया क्या है? ल्यूकोप्लाकिया के लक्षण, प्रकार,बचाव और घरेलू उपाय (What is Leukoplakia? Leukoplakia symptoms, types, prevention and home remedies)



ल्यूकोप्लाकिया क्या है?
(what is leukoplakia in Hindi)

ल्यूकोप्लाकिया उस स्थिति को कहते हैं, जिसमें गाल के अंदर, मुंह के नीचे,  मसूड़ों या फिर जीव पर मोटी और सफेद धब्बे बन जाते हैं।
इस सफेद धब्बे को हटाया नहीं जा सकता ल्यूकोप्लाकिया के कारण का सही पता नहीं लगाया जा सकता है।

लेकिन इस तरह के धब्बे का प्रमुख कारण धूम्रपान, तंबाकू से होने वाले जलन प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा मुंह में अन्य प्रकार की समस्याएं जैसे कि गाल और जीव का वार - वार कटना या अन्य तरह के घर्षण ल्यूकोप्लाकिया के कारण बन सकते हैं। छोटे धब्बे आमतौर पर खतरनाक नहीं होते और जल्द ही ठीक भी हो जाते हैं, अगर ऐसे छोटे डब्बे जल्द ठीक ना हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह गंभीर होने की स्थिति में ओरल कैंसर की वजह बन सकती है बन सकता है।


मुंह में सफेद दाग होने के प्रकार
ल्यूकोप्लाकिया के प्रकार
(Types of leukoplakia)

ल्यूकोप्लाकिया दो प्रकार के होते हैं

1.होमो जीनस ल्यूकोप्लाकिया 

होमो जीनस ल्यूकोप्लाकिया सफेद रंग के पतली परत होती है, इसके अलावा यह चिकना, खुरदुरा जैसे दिखने में लगते हैं। यह समानता खुद-ब-खुद ठीक होगी जाते हैं।

2.नॉन होमोजीनस ल्यूकोप्लाकिया

नॉन होमोजीनस ल्यूकोप्लाकिया यह सफेद धब्बे (दाग) के चारों और लाल रंग के छल्ले के होते हैं। यह ओरल कैंसर हो सकते हैं अगर ऐसी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत ही डॉक्टर से परामर्श लें।

ल्यूकोप्लाकिया के लक्षण 
(Symptoms of leukoplakia in Hindi)

इसके समान लक्षण है, जैसे कि सफेद और दाने दार धब्बे मुंह, गले और जीव में हो जाते हैं, इसमें दर्द नहीं होता कुछ समय के लिए नजर भी नहीं आते।
अगर ल्यूकोप्लाकिया बड़े लाल धब्बे दिखाई दे तो यह कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

मुंह में सफेद दाग के कारण
(Cause of leukoplakia in Hindi)

•तंबाकू का सेवन या ज्यादा तंबाकू चबाने से
•तंबाकू रहित स्मोकिंग करना 
•लंबे समय से शराब की लत 
•नुकीले दांत के कारण 
•हेयरी ल्यूकोप्लाकिया यह खासतौर पर एचआईवी और एड्स से पीड़ित व्यक्ति में होता है।
•इसके एक कारण यह भी हैं,कमजोर इम्यूनिटी सिस्टम

ल्यूकोप्लाकिया के बचाव और उपाय
(Prevention of republican in Hindi)

• सबसे पहले नशे से दूरी बनाएं अगर शराब की लत है तो उसे तुरंत बंद कर दें।
• तंबाकू का सेवन बंद करें
• धूम्रपान से ल्यूकोप्लाकिया के खतरे सबसे अधिक होते हैं, इसीलिए इसे तुरंत बंद करें ।

मुंह में सफेद दाने के घरेलू उपाय 
(Home remedies for leukoplakia)

- घरेलू उपाय खास कारगर तो नहीं पर कुछ परहेज करके ल्यूकोप्लाकिया को कंट्रोल कर सकते हैं। 
• तंबाकू, स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन तुरंत बंद करें 
•फल और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें 
•विटामिन सी का अधिक सेवन करें इससे इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा 
•अपने डाइट में विटामिन ए भी शामिल करें 
साथ में वर्कआउट जरूर करें


(Note:- 
अगर आपके मुंह के सफेद दाग जल्द ठीक ना हो रहे हो तो डॉक्टर से परामर्श जल्द से जल्द ले)



(दोस्तों अगर आप कोई भी हेल्थ टिप्स के बारे में जानना चाहते हैं तो हमें कमेंट में जरूर बताएं। आपको यह ब्लॉक कैसा लगा यह भी आप मुझे कमेंट में जरूर बताएं । 



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Dr.Sumit Ranjan 










गुरुवार, 16 सितंबर 2021

दांतों की सफाई (how to cleaning teeth)

दोस्तों दांत हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं, दांतो को स्वस्थ रखना उतना ही जरूरी है जितना कि शरीर के अन्य अंगों को।


खिलखिलाती मुस्कान आपके व्यक्तित्व में चार चांद लगा देती हैं, और आपके कॉन्फिडेंस को इंप्रूव करती है। इसके अलावा यदि आपके दांत गंदे या फिर पीले दिखते हैं, तो यह देखने में भद्दा तो लगता ही है साथ ही इसकी वजह से आपको कई बार शर्मिंदा भी होना पड़ता है, और आपके कॉन्फिडेंस में भी कमी आती है।


दोस्तों आज मैं आपको बताऊंगा दांतो की सफाई किस तरह करनी चाहिए और बताऊंगा कुछ अफवाहों के जो दांतो से संबंधित है, अगर आप इस तरह की अफवाहों पर विश्वास करते हैं तो विश्वास करना बंद कर दें।



1.कौन सा टूथब्रश हमारे दांतो के लिए बेस्ट है


आमतौर पर बहुत सारे लोगों का मानना है कि हार्ड ब्रश के उपयोग से दांत अच्छी तरह साफ होते हैं और सफेद रहते हैं। पर वास्तविकता कुछ और है, अगर आप हार्ड ब्रश करते हैं, तो इससे दांत की ऊपरी परत जिसे इनेमल (Enamel) कहते हैं, वह घिस जाती है। जिसके कारण ठंडा गरम लगने की समस्या उत्पन्न हो जाती है, हार्ड ब्रश आप के मसूड़े को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

दांतों की सफाई के लिए मुलायम टूथब्रश का ही इस्तेमाल करें,(सॉफ्ट ब्रिस्टल वाले टूथब्रश)


2.ब्रश करने का सही तरीका

हल्की हाथों से टूथब्रश करें कम से कम 2 मिनट ब्रश जरूर करें, ऊपर वाले दांतो की सफाई के लिए ब्रश को नीचे की और नीचे वाली दातों की सफाई के लिए ब्रश को ऊपर की ओर ले जाएं मसूड़ों से लेकर दांतो तक यह प्रतिक्रिया कम से कम 20 बार करें, फिर ब्रश को सर्कुलर मोशन में धीरे-धीरे घूमऐ इसके बाद आप पानी से कुल्ले ले कर ले और जीभ की सफाई अच्छे तरीके से टंग क्लीनर से साफ करें।

3.दांतों की सफाई के लिए बेस्ट टूथपेस्ट कौन सा है / और टूथपेस्ट की मात्रा कितनी लेनी चाहिए


मैं आपको बता दूं दांत की सफाई के लिए टूथपेस्ट की भूमिका जायदे नहीं होती है। दांतो के लिए टूथपेस्ट एक मीडियम का काम करती है जो लुब्रिकेशन और फ्रेशनेस का काम करती है।

असली भूमिका आपके ब्रशिंग टेक्निक का होता है।

अगर आप टूथपेस्ट लेने जाते हैं तो ध्यान रखें इस में फ्लोराइड की मात्रा होनी चाहिए जो आपके दांतों को डीके होने से बचाता है।

टूथपेस्ट मटर के दाने जितना ही यूज़ करनी चाहिए।

दांतो के लिए मंजन और टूथ पाउडर के इस्तेमाल से बचें

अगर मंजन या फिर टूथ पाउडर पाउडर का इस्तेमाल करते भी हैं तो इसे उंगली से नहीं करें बल्कि ब्रश से करें।


4.ब्रश कब करनी चाहिए


ब्रश दिन में कम से कम 2 बार करनी चाहिए आपने अक्सर लोगों को देखा है कि वह बिना ब्रश किए कुछ खाते - पीते नहीं है। ऐसा इसलिए है कि उन्होंने यह आदत बना ली है।

भोजन करने के बाद ब्रश करना चाहिए पहले ब्रश करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए सुबह में खाने के बाद और रात में सोने से पहले ब्रश करना चाहिए।

हालांकि पहले ब्रश करने में कोई बुराई नहीं है पर खाने के बाद भी ब्रश कर सकते हैं

5.क्या टीथ स्केलिंग से दांत कमजोर पड़ जाते हैं


दोस्तों अक्सर लोगों को लगता है कि टीथ स्केलिंग से दांत कमजोर पड़ जाते हैं, दांत हिलने लगते हैं और दांतो के बीच में गैप बन जाता है। पर यह एक प्रकार का मिथ्य है। दांतो की सेहत, मुंह की स्वच्छता, और मसूड़ों को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक 6 महीने या फिर 1 साल में नियमित रूप से टीथ स्केलिंग करानी चाहिए। दांतों में कुछ पार्टिकल ऐसे होते हैं, जो सामान्य ब्रशिंग से साफ नहीं किए जा सकते दातों की  स्केलिंग अच्छे डॉक्टर से करवाएं जो उचित तकनीक से करता हो।

(क्विक से सावधान रहें)


6.मुंह का स्वास्थ्य ही संपूर्ण स्वस्थ है


आपके मुंह और आपके शरीर का महत्वपूर्ण संबंध है।

क्योंकि हमारे शरीर में खाना मुंह के द्वारा ही जाता है, मुंह के द्वारा कई जीवाणु संक्रमण हमारे रक्त प्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, खास तौर पर ह्रदय रोग, डायबिटीज, गैस्ट्रिक अल्सर इत्यादी । जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है।


7.दांतों में दर्द या फिर कीड़ा लगने पर क्या करें?


दांतों में दर्द या कीड़ा लगने पर तुरंत ही डेंटिस्ट से मिले ना कि घरेलू नुक्सा अपनाएं, बहुत से लोग दांतो के दर्द को तब तक बर्दाश्त करते हैं जब तक वह दर्द से बेचैन ना हो जाए या फिर या फिर फेस पर स्वेलिंग (swelling) ना दिखने लगे थक हार कर तब वह डेंटिस्ट के पास जाते हैं।


(अगर मुंह को स्वस्थ रखना है तो प्रत्येक 6 महीने पर डेंटिस्ट से जरूर मिले)


                        🙏धन्यवाद🙏


Dr.Sumit Ranjan 





बुधवार, 15 सितंबर 2021

दांत को स्वस्थ और मसूड़ों को मजबूत बनाने के तरीके

दांतो को जिंदगी भर स्वस्थ रखने के बहुत से तरीके हैं, शायद आप बहुत से तरीके जानते भी होंगे । 
कुछ लोग दांतो की तरफ तभी ध्यान देते हैं, जब दांतों में कोई समस्या आने लगती है । जब तक दांतों में कोई समस्या ना हो तब तक हमें लगता है कि हमारे दांत एकदम स्वस्थ हैं, और हमें कुछ कराने की जरूरत नहीं, यही हमारी सबसे बड़ी गलतफहमी है। दांतों की समस्या एक-दो दिन में नहीं आती बल्कि तो सालों की गलतियों का नतीजा है।मैं आज मैं आपको दांतों को स्वस्थ रखने का तरीका बताऊंगा जिसकी सहायता से आप अपने दांतों और मसूड़ों को बुढ़ापे तक मजबूत बनाए रख सकते हैं।
बस आप इस तरीके को अपने लाइफ स्टाइल में शामिल करें :-

1. ब्रश सही तरीके से करें, और कम से कम दिन में दो बार ब्रश करें और कम से कम एक बार फ्लैश करें।


(ब्रश करने के लिए मुलायम टूथब्रश का ही इस्तेमाल करें। ब्रश करते समय ध्यान रखें कि दांतों को न रगड़ें, बस उन्हें हल्के हाथों से साफ करें। कम से कम दो मिनट तक ब्रश करें। दांतों को साफ रखने के लिए, ब्रश करना आवश्यक है, ताकि आपके दांतों के बीच फंसे भोजन के सभी कण निकल जाएं, इसलिए आपको पूरे मुंह में दो मिनट तक ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं घुमाकर अच्छी तरह से ब्रश करना चाहिए। ब्रश करने के बाद, उंगली से दांतों की हल्की मालिश करना न भूलें।

2. खाने के बाद कुल्ला अवश्य करें


3. जीभ की सफाई


(जीभ की सफाई भी बहुत महत्वपूर्ण है। यदि जीभ गंदी रहती है, तो बैक्टीरिया बढ़ सकता है, जो मुंह की गंध का कारण भी है। इसलिए ब्रश करने के साथ-साथ जीभ को अच्छी जीभ-क्लीनर से साफ करना आवश्यक है।)

4.मसूड़ों की मालिश करें


5.फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें


6.चाय कॉपी और कोक जैसी पदार्थ कम लें


(अधिक ठण्डे या गर्म पदार्थों का सेवन न किया करें | जैसे आइसक्रीम, फ्रीज का पानी या बहुत गर्म चाय पीना या बहुत गर्म भोजन खाना। कोई गर्म पेय या पदार्थ पी-खाकर तुरंत ठंडी चीज ठण्डे पेय का सेवन न करें)

7.मीठा कम खाएं 


(मीठी चीजें जैसे मिठाईया, चाकलेट या कोल्ड्रिंक का अधिक सेवन ना करें। यदि ऐसी चीज खा ले तो उसके तुरंत बाद पानी से कुल्ले अवश्य करें )


8. खाने में सलाद फल वगैरा वगैरा ले 


(ताज़े फलों और सब्जियों को दांतों से काटकर और चबाकर खाने से जबड़ा मजबूत होता है। फास्ट फूड सुविधाजनक हैं लेकिन हमारे शरीर के साथ-साथ दांतों के लिए भी हानिकारक हैं। खाने की चीजों को छोटे टुकड़ों में न काटें, बल्कि उन्हें जबड़े से चबाने की आदत बनाएं। खास तौर पर ऐसे फल जिनमें विटामिन सी होता है।)

9. सोने से पहले कुछ ना खाएं


10. ब्रश एवं कुल्ला करके रात में सोए

Note :- 

1.हर 6 महीने में डेंटिस्ट से मिले


(डेंटिस्ट से कहें कि जो आपके मुंह और दांतों के लिए अच्छी सलाह हो वह आपको दे, इलाज में कोताही कभी ना बरतें।)

2.ग्रीन टी में पाया जानेवाला पॉलीफिनॉल (Polyphenols) दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह दांतों में स्थित बैक्‍टीरिया से भी लड़ता है।


(दोस्तों अगर आप कोई भी हेल्थ टिप्स के बारे में जानना चाहते हैं तो हमें कमेंट में जरूर बताएं। आपको यह ब्लॉक कैसा लगा यह भी आप मुझे कमेंट में जरूर बताएं । 

🙏धन्यवाद🙏


Dr.Sumit Ranjan






फैटी लीवर क्या है? फैटी लिवर के लक्षण, कारण, उपचार, और बचाव || What is Fatty Liver? Fatty liver symptoms, causes, treatment, and prevention in Hindi

लीवर हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, लीवर को हिंदी में यकृत, जिगर, कलेजा कहते हैं‌। लीवर का प्रमुख कार्य विभिन्न चायपचायों को डिटॉक्सिफाई (...